Saraswati Vidya Mandir

Arya Nagar (North) Gorakhpur

हमारी विशेषताएं:

  • शिक्षक:- शिक्षा का महत्वपूर्ण अंग अध्यापक हैं जिन्हें विद्या मंदिर में आचार्य कहते हैं। शैक्षणिक योग्यता के साथ, शिक्षा में रूचि, भारत की मान बिन्दुओं के प्रति निष्ठावान, अनुशासित तथा चरित्रवान शिक्षक है।
  • शिक्षा:- शिक्षण की जितनी भी मान्य पद्धतियाँ हैं उन सभी तत्वों को लेकर एक विशेष पद्धति का अनुसरण किया जाता है, जिसका आधार भारतीय संस्कृति एवं शिक्षा है। संस्कारों को पुष्ट करने के लिए विभिन्न शिक्षणेत्तर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
  • संस्कार भारती: व्यवस्था प्रिय एवं उत्तरदायित्व का भाव जगाने हेतु, संस्कार भारती का गठन किया जाता है। इस संस्था द्वारा पुस्तकालय, वाचनालय की व्यवस्था, जयन्तियों का आयोजन, विशेष व्यक्तियों के आगमन पर उन्हें सम्मान प्रदान करना, प्रवचन, मंचीय कार्यक्रम तथा साहस और ज्ञान वर्धन हेतु गीत, कहानी, कविता का आयोजन।
  • सरस्वती यात्रा:- नगर के विशेष स्थान तथा निकटवर्ती जनपदों में विशेष स्थान के भ्रमण के कार्यक्रमों के द्वारा सामान्य ज्ञान कोष समृद्ध किया जाता है।
  • देश दर्शन यात्रा:- ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थानों का अध्ययन इस यात्रा द्वारा कराया जाता है।
  • पुस्तकालय:- बाल साहित्य तथा उद्धरण संम्बधी पुस्तकों का विशाल पुस्तकालय है। जहाँ सप्ताह में भैया एक पुस्तक प्राप्त करते हैं। उद्धरण पुस्तकों के अध्ययन के लिए विद्यालय में ही व्यवस्था है।
  • पत्रिका:- बालकों की रचना प्रवृत्ति को जगाने के लिए विद्यालय की अपनी वार्षिक पत्रिका ‘‘जागृति’’ है।
  • एकरूपता:- धन पति एवं धनहीन दोनों के बच्चे एक ही वेष में विद्यालय आयें। इसके लिए गणवेश रखा गया है। बालकों के शरद एवं ग्रीष्मकालीन वेश भिन्न-भिन्न हैं।
    • क:- बौद्धिक भाषा, अन्त्याक्षरी, सुलेख, कला आदि का आयोजन मासिक स्तर पर किया जाता है।
    • ख:- शारीरिक विकास हेतु दैनिक कार्यक्रमों की योजना है। समय-समय पर शारीरिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
  • पुरस्कार योजना:- हमारे संस्थान द्वारा विभिन्न अवसरों पर हमारे आचार्य/आचार्यों एवं भैयाओं के उत्साह वर्धन हेतु विभिन्न प्रकार के पुरस्कार की योजना है।
  • अभिभावक गोष्ठी:- वर्ग एवं कक्षासः भैयाओं के अभिभावकों की छमाही गोष्ठी आयोजित होती है, जिसमें अभिभावक अपनी समस्या रखते हैं तथा विद्यालय अपनी योजनाओं को बताता है। दोनों के सामयिक विचार विनिमय से बालकों का विकास किया जाता है।
  • वार्षिकोत्सव एवं सरस्वती पूजन: बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन एवं वार्षिकोत्सव सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है।