Saraswati Vidya Mandir

Arya Nagar (North) Gorakhpur

सरस्वती विद्या मन्दिर बालिका इण्टर कालेज: हमारा लक्ष्य एवं उद्देश्य

  • 1- स्वच्छ सुन्दर आधुनिक साज-सज्जा से नवनिर्मित भवन।
  • 2- सुयोग्य, संस्कारित आचार्यों द्वारा मनोवैज्ञानिक विधि से अध्यापन।
  • 3- संस्कारक्षम वातावरण से दैनिक जीवन में दैनन्दिनी संस्कारों की उत्तम व्यवस्था।
  • 4- नियमित, निर्धारित गृहकार्य की व्यवस्था।
  • 5- क्रिया आधारित शिक्षण पर बल।
  • 6- व्यवस्था प्रियता, नागरिकता, व्यक्तित्व शक्ति विकास हेतु छात्र/छात्रा संसद की व्यवस्था।
  • 7- कम्प्यूटर शिक्षा की व्यवस्था।
  • 8- उत्तरदायित्व की भावना हेतु छात्र मंत्रिमंडल की रचना।
  • 9- विषयों के व्यवहारिक ज्ञान हेतु संस्कार भारती का गठन।
  • 10- सामाजिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक, धार्मिक ज्ञानार्जन हेतु दर्शन (यात्राएं) शिविर एवं प्रदर्शनियों का आयोजन।
  • 11- शिक्षार्थ आइये, सेवार्थ जाइये की भावना को व्यवहारिक रूप देने हेतु असहाय एवं अशिक्षित क्षेत्रों में सेवा के कार्यो का आयोजन।
  • 12- मातृभूमि, संस्कृति, धर्म, परम्परा एवं महापुरुषों के सम्बन्ध में सम्यक जानकारी हेतु संस्कृति ज्ञान परीक्षा।
  • 13- आध्यात्मिक, वैज्ञानिक एवं आधुनिकतम साधनों द्वारा शारीरिक एवं योग प्रशिक्षण की व्यवस्था।
  • 14- आचार्य, छात्र एवं अभिभावक में पारिवारिक समरसता एवं सतत् परामर्श हेतु कक्षासः अभिभावक गोष्ठी का आयोजन।
  • 15- लेखन प्रतिभा के विकास हेतु वार्षिक पत्रिका जागृति का सम्पादन एवं प्रकाशन।
  • 16- छात्राओं के सर्वांगीण मूल्यांकन हेतु सतत् समीक्षात्मक पद्धति का प्रयोग।
  • 17- शारीरिक, मानसिक, व्यावसायिक, नैतिक और आध्यात्मिक पंचमुखी शिक्षा व्यवस्था। विद्यालय का आगामी सत्र वर्तमान सत्र की समाप्ति के तुरन्त पश्चात प्रारम्भ होगा। विद्यालय में छात्राओं का प्रवेश वरीयता क्रम के अनुसार लिया जायेगा। विस्तृत जानकारी हेतु विद्यालय कार्यकाल के अवधि में प्रधानाचार्य से सम्पर्क करें।
  • 18- समुचित व्यय में बालिकाओं का पूर्ण विकास।
  • 19- बालिकाओं के चरित्र का इस ढंग से निर्माण कि वह कठिन काल में उनके जीवन की ज्योति तथा संबल बन सके।
  • 20- ‘‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ आत्मा के सिद्धांतानुसार सुगठित तथा निरोग शरीर रचना पर पूरा ध्यान।
  • 21- जीवन के प्रति कला और आनन्द की वृत्ति निर्माण के लिए सभी प्रकार की सुरूचियों तथा सुसंस्कारों को जाग्रत करना।
  • 22- बालिकाओं में शिष्टाचार, सदाचार, सामाजिक भाव, राष्ट्रभक्ति तथा परस्पर सहयोग वृत्ति का निर्माण।